किसी की याद को हम दिल में हैं सजोये हुए

किसी की याद को हम दिल में हैं सजोये हुए
ज़माना गुज़रा हमें पुरसुकून सोये हुए-

वो देखते हैं कोई ख्वाब खुली आँखों से
किसे खबर है कि जागे हैं या हैं सोये हुए-

वो हँस रहे हैं मेरी बदनसीब दुनिया पर
में देखता हूँ जिधर आँख को भिगोये हुए-

हरेक सम्त हैं दहशत के बेकराँ साये
ये बीज सब हैं सियासत के आज बोये हुए-

कोई हसीन नज़ारा नज़र नहीं आता
तो हम भी फिरते हैं ‘वर्मा’ वतन में खोये हुए।