खौफ दहशत का मंज़र नहीं चाहिए

खौफ दहशत का मंज़र नहीं चाहिए
माफ़िया कोई रहबर नहीं चाहिए-

मस्लेहत लाख हो डर नहीं चाहिए
झुकने वाला हमें सर नहीं चाहिए-

अपना ईमान हम बेंच सकते नहीं
चोर बाज़ार में घर नहीं चाहिए-

अपनी मेहनत की रोटी कमा खा सकें
ओर कुछ बन्दा परवर नहीं चाहिए-

हर कदम मुल्क गुमराह मंज़िल से हो
अब हमें ऐसा रहबर नहीं चाहिए-

नेह रिश्तों का बिकता हो, पल-पल जहाँ
हमको ऐसा कोई घर नहीं चाहिए।