दिल की हसरत लेके अँगड़ाई जवाँ हो जायेगी

दिल की हसरत लेके अँगड़ाई जवाँ हो जायेगी
मुझपे जब उनकी निगाहे-मेहरबाँ हो जायेगी,

मोआमला है मेरा उनका और आप होते हैं कौन
बात मेरे और उनके दरमियाँ हो जायेगी,

इन ताएस्सुब के चिरागों को, बुझा दो दोस्तो
वर्ना रूसवा एक दिन ये धरती माँ हो जायेगी,

मत करो गुलशन का सौदा, वर्ना मेरे दोस्तो
अम्न की हर एक कोशिश, रायगाँ हो जायेगी,

इतनी आगे बात बढ़ने की, न थी कोई उम्मीद
क्या खबर थी बेज़बानी ही जबाँ हो जायेगी,

शान्ति-का संदेश पहुँँचाते रहो-सबको ‘उमेश
कंकरी इस धरती माँ की कहकशां हो जायेगी।