मोतबर लम्ह-ए-हयात करें

मोतबर लम्ह-ए-हयात करें
खुशनुमा दिल की कायनात करें,

कोई अपना नहीं ज़माने में
किसके उम्मीद-ए-इल्तफात करें,

उनको भड़काया किसने मेरे खिलाफ
आओ पहले ये मालूमात करें,

उनको मुझसे अगर शिकायत है
सामने आ के मेरे बात करें,

दरम्याँ जो हमारे हायल हैं
किस तरह हल वो मुश्किलात करें,

जिनमें मेहरो-वफा के हो मोती
जेब तन ऐसे ज़ेवरात करें,

इस कदर ख़ामुशी नहीं अच्छी
शीश ओ संग ही की बात करें,

अहले-महफिल से आज कह दो ‘उमेश’
ज़िक्रे-महबुब सारी रात करें।