रूख से परदा तू कब हटायेगा

रूख से परदा तू कब हटायेगा,
और कितना मुझे सतायेगा,

तेरा दीवाना आस का जुगनू
कब तलक पलकों पे सजायेगा,

हो रही है बहार भी रूखसत
मेरे महबूब कब दू आयेगा,

तेरी बातों का एतबार नहीं
वायदा करके तू भूल जायेगा,

कर रहा है जो अम्न को बातें
आग धर में वही लगायेगा,

जो हिफाज़त न कर सके अपनी
शहर क्‍या खाक वो बचायेगा,

जो वफा से है नाशनास ‘उमेश
आँख मुझसे वो क्या मिलायेगा।

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