वो लफ़्ज-लफ़्ज को रौशन ख्याल देता है

वो लफ़्ज-लफ़्ज को रौशन ख्याल देता है
हरेक शख़्स को उलझन में डाल देता है

वो लिखना चाहता है जब हमारे बारे में
कसम खुदा की समंदर खगाल देता है,

मैं रूख से परदा हटाने को जब भी कहता हूँ
वो करके वादा सलीके से टाल देता है,

ये उसका दोस्तो एहसान कम नहीं मुझ पर
वफा-शिआरों को मेरी मिसाल देता है,

जहाँ में बस वही होता है कामयाब “उमेश
जो खुद को वक्त के साँचे में ढाल देता है।

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