गम के मारों की बात करते हें

गम के मारों की बात करते हें
बे सहारों बात करते हैं,

नींद छीनी, जिन्होंने आँखों से
उन नज़ारों की बात करते हैं,

आशियाना जला के वो मेरा
अब उजालों की बात करते हैं,

जिनके पेरों तले ज़मी भी नहीं
आसमानों की बात करते हैं,

उड़ गया होश, देखकर जिनको
उन निगाहों की बात करते हैं,

जब से गुज़रे हैं, तेरे गुलशन से
सिर्फ खारों की बात करते हैं,

हाथ में जिनके कुछ नहीं ऐ ‘उमेश’
वो खज़ानो की बात करते हैं।